ये तथ्य जानते हुए भी मैंने ऐसी एक तुलना करने की कोशिश करी, लेकिन जो मुझे पता चला वो थोडा हताश करने वाला था | इस comparison का result जानने से पहले आपको कुछ और भी समझना पड़ेगा |
हम सबका अपना नेता चुनने का criteria थोडा अलग अलग होता है | जैसे कुछ लोग कपडा brand देख कर खरीदते हैं, वैसे ही कुछ लोग पार्टी या धर्म-जाती देख कर चुनते हैं, और यही व्यक्ति सबसे ज्यादा होते हैं | कुछ लोग केवल उस दूकान से कपडा खरीदते हैं जहाँ से उनके बड़े खरीदते थे, ऐसे लोग एक ख़ास परिवार के व्यक्ति को ही वोट करते हैं | कुछ लोग ऐसे होते हैं जो किसी भी दूकान से कपडा ले सकते हैं बशर्ते की दुकानदार अपने सामन को अच्चा साबित कर दे , ये लोग कुछ ऐसे ही होते हैं जो नेताओं के लुभावने वादों में आकर वोट देते हैं | कुछ लोग कपडे की quality check करके कपडा लेते हैं, जैसे कुछ हमारे जैसे जिन्हें वोट देने से पहले नेता की कुंडली देखने की खुजली उठती है |
हालांकि ये कुंडली देखने वाला काम है बहुत थकाने वाला और confuse करने वाला | 10 प्रत्याशी मतलब 150 पन्नो की किताब, और यदि आप इन्ही प्रत्याशियों के पिछले इलेक्शन का affidavit भी देखने लगे तो लगभग 300 पन्ने मान लीजिये | अब इन पन्नों का आपस में compare करने वाला काम सबसे ज़बरदस्त है |
2017 और 2022 के affidavits को compare करने से आपको ये पता चल जाता है की उस प्रत्याशी ने अपनी संपत्ति में कितनी बढ़ोतरी करी, और क्या वो उसके द्वारा इन वर्षों में कमाए गए धन के अनुरूप सही है | पिछले पांच वर्षों की आमदनी भी इन affidavits में प्रत्याशी द्वारा भरी जाती है |
इसके अलावा उसकी शैक्षिक योग्यता, और उसका क्रिमिनल रिकॉर्ड भी आपको सही चुनाव करने में मदद कर सकता है |
कुछ उम्मीदवारों की शक्ल ही उनका आधे से ज्यादा character-certificate दे देती है | हो सकता हैं की ये बात आप में से कुछ को सही न लगे, किन्तु मेरा अपना व्यक्तिगत मत यह है की एक इंसान की शक्ल उसके बारे में काफी कुछ बता देती है | ये अंदाज़ा काफी कम cases में ही गलत होता है |
अब आती है आपके confuse होने की बारी | जी हाँ आपने सही सुना | confuse इसलिए क्योंकि कोई प्रत्याशी शकल से गुंडा है , कोई अपने affidavit के हिसाब से गुंडा है | कोई पिछला चुनाव जितने के बाद अपनी संपत्ति में अप्रत्याशित बढ़ोतरी कर चुका है | किसी के पास Arms-licence और हथियार इतने हैं की समझ नहीं आता कि इनकी जान को इतना खतरा क्यों है | कुछ प्रत्याशी ऐसे भी मिलते हैं जिन्होंने बैंक से लाखों का loan ले रखा है, जबकि उनके अपने खातों में करोड़ों रुपये आराम कर रहे हैं | वही कुछ प्रत्याशी ऐसे भी मिलते हैं जिनके बैंक खाते में केवल 101 रूपए हैं, अब ये प्रत्याशी चुनाव कैसे लडेगा, ये समझ से बाहर है | कुछ प्रत्याशी ऐसे भी मिलते हैं जो केवल दसवी पास हैं, जिन्होंने कभी Income Tax भी जमा नहीं करा , अब ये विधान सभा में जा कर bills को समझ भी पायेंगे या नहीं , ये समझ नहीं आता |
तो totally हम हो चुके हैं Confuse | अब यदि 300 पन्ने खंगालने के बाद कोई व्यक्ति confuse होगा तो वो NOTA का बटन भी दबा सकता है | हालाँकि मेरा अभी ऐसा कोई विचार नहीं है, क्योंकि अपने एक पुराने लेख में मैंने बताया था की NOTA अपने वोट को व्यर्थ करने का सबसे उत्तम साधन है |
Political Elections are for choosing the least worst candidate. एक चुनाव में यदि आपको कोई अच्छा पत्याशी न मिले तो आपको उस को चुनना चाहिए जो सबसे कम खराब हो | और यदि आप यह करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं , तो आप प्रत्याशी का चुनाव मत करिए, बल्कि मुख्यमंत्री/प्रधानमन्त्री का चुनाव करिए | आप अलग अलग दलों का election-manifesto पढ़िए और अपने विवेक से वोट करिए |
https://affidavit.eci.gov.in . इस वेबसाइट पर जा कर आप अपने क्षेत्र के हर प्रत्याशी का affidavit यानि हलफ़नामा देख सकते हैं, और खुद को कंफ्यूज करने में मदद कर सकते हैं | यदि हमारा चुनाव आयोग चाहे तो Digital India और Make in India से प्रेरित होकर इस confusion को कम करने में मदद कर सकता है | यदि चुनाव आयोग की website पर इन नताओं का biodata केवल हाथ से लिखे हुए affidavit के अलावा ऐसे digital format में हो जिसे आम आदमी आसानी से समझ सके और compare कर सके तो सही चुनाव करने में कुछ जागरूक मतदाताओं की मदद हो सकती है | हालांकि ऐसा अगले कुछ सालों में होगा , इसमें मुझे संशय है, क्योंकि ऐसा होने से कई नेताओं को घाटा हो सकता है |
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